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पलटते बयानों के साथ बाबा रामदेव की कोरोना की दवाई का दावा झूठा?

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पिछले महीने की 23 तरीक को जब बाबा रामदेव , आचार्य बालकृष्ण व अन्य साथियों ने घोषणा की कि की उन्हें कोरोना से लड़ने का इलाज मिल चुका है तब न सिर्फ बड़े बड़े साइंटिस्ट और रेसेअर्चेर को बल्कि सरकार को भी यकीन नहीं हुआ. और जैसे- जैसे एक हफ्ते में अलग-अलग बयान पतंजलि से आने लगे वैसे ही आम लोगो का भरोसा भी उठ सा गया . आइये इस पर चर्चा शुरू से करते है कि कैसे बयान बाज़ी चली और अब पतंजलि की सनसनी कोरोनिल दवा महज़ एक इम्युनिटी बूस्टर रह गई हैं ?

रामदेव ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस


23 जून २०२० को बाबा रामदेव , आचार्य बालकृष्ण और जयपुर के हॉस्पिटल के साथियो की टीम के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी . इस कांफ्रेंस में उन्होंने कोरोना किट लॉन्च की और कहा की इस दवा को 120 मरीज़ो पर टेस्ट किया गया था , और जो परिणाम आया है वो बहुत लाभदायक है . रामदेव की माने तो ये दवाई कोरोना से लड़ने में समर्थ है .

आचार्य बालकृष्ण ने कॉन्फ्रेंस में कहा था की ” ये तुलसी , अश्वगंधा और गिलोय से बना है जो इम्युनिटी को पुश करता है . ये दवाई एक साथ पाचन शक्ति , मधुमेह , और ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल करता है . ये दिल की धड़कन और क्रोनिक बीमारी को बूस्ट करता है .

कोरोनिल किट कैसे और किस्से बनी है ?


कोरोनिल किट को कॉन्फ्रेंस में ही लोगो के सामने रखा गया . इस किट में तीन दवाई है – पहली है करोनिल , जो की एक नई दवाई बताई जा रही है जिसमे गिलोय , अश्वगंधा और तुलसी का उपयोग हुआ है . दूसरी और तीसरी दवाई है श्वसारी और अणु तेल . जो काफी समय पहले से पतंजलि बेच रहा है . तो नया क्या? सिर्फ करोनिल क्युकी श्वसारी और अणु तेल पहले से पतंजलि सर्दी और ज़ुकाम जैसी बीमारी के लिए बेच रही थी .

Baba ramdev Coronil Tablet


हास्यास्पद बात तो ये है की इन बीमारियों से लड़ने के लिए ये उपाय तो पहले से ही बाबा रामदेव द्वारा वीडियो में बताया गया है तो इस लॉन्च कि क्या जरूरत आ पड़ी?

बाबा रामदेव का दावा


बाबा रामदेव ने इस बात का दावा किया था की ये कोरोना से लड़ने वाली पहली दवाई है , इसका मतलब ये है की कोरोनिल कोई इम्म्युंटी बूस्टर नहीं , एक दवाई है .

डॉक्टर बलबीर तोमर ने कहा की मेरे पास 120 मरीज़ थे , उन पर एक प्रक्रिया के तहत ये दवाई दी उन्होंने कहा की दवाई मरीज़ो को तीनो टाइम के खाने के बाद दी गई थी. उनका दावा है की कोरोनिल ने क्लीनिकल टेस्ट पास किया था.


उत्तराखंड के आयुर्वेद डिपार्टमेंट ने भी इस बात का खुलासा किया की पतंजलि ने उनसे इम्युनिटी बूस्टर का लाइसेंस बनवाया था .


जब आयुष्मान मंत्रालय से कोरोनिल का ट्रायल और उसके सर्टिफिकेट के बारे में पूछा गया तो मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा की पतंजलि ने इसके लिए दवाई बताकर नहीं बल्कि एक इम्युनिटी बूस्टर बताकर सर्टिफिकेट लिए था . लेकिन अब आयुष्मान मंत्रालय ने पतंजलि को दवाई का दावा करने पर नोटिस भेज कर ट्रायल के दस्तावेज़ मांगे .

बाबा रामदेव


इसी के चलते मंत्रालय ने इसके प्रमोशन और बिक्री पर रोक लगा दी है .


आचार्य बालकृष्ण का बदला हुआ बयान सुर्खियों में

हमने यह कभी भी नहीं कहा कि हमने कोरोना की कोई भी दवाई बनाई है। हमने एक इम्यूनिटी बूस्टर बनाया और उसका प्रयोग कोरोना के रोगियों पर किया। सभी आरोपों को खंडित करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह हमारे खिलाफ एक साजिश हैं

धारा 420 के तहत हुई FIR


जयपुर के ज्योतिनगर के थाने में बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण , वैज्ञानिक अनुराग वसुनेन , डॉक्टर बलबीर सिंह तोमर और अन्य दो के खिलाफ केस दर्ज हुआ . ये केस एक जयपुर के वकील ने ही किया है . वकील बलराम झाकर का मानना है की ये मामला धोकादरी और लोगो को गुमराह करने वाला है . इस में डॉक्टर बलबीर सिंह का बयान भी शामिल है .


बलबीर सिंह ने कहा की ” दवा के ट्रायल से पहले हमने CTRI से अनुमति ली थी . ये ICMR की ही बॉडी है . फिर NIMS जयपुर के 120 मरीज़ो पर हमने इस दवा का ट्रायल भी किया था . फीसदी मरीज़ तीन दिन में और सात दिन फीसदी मरीज़ ठीक हो गए थे “.


बिहार के हाई कोर्ट में भी पतंजलि के खिलाफ केस दर्ज हुआ है. गुमराह करने का और झूठे दावे करने का मामला दर्ज हुआ है .

क्या है सही तरीका दवाई को टेस्ट करने का ?


सबसे पहले दवाई के ट्रायल के बारे में CTRI को बताना होता है . उसके बाद दवाई बेचने के लिए Central Drug Standard Control Organisation से सर्टिफिकेट लेना होता है . उसके बाद आप ऐसे प्रचार आदि कर सकते है .

CTRI सिर्फ ट्रायल का रिकॉर्ड रखती है , न की ट्रायल करवाती या सर्टिफिकेट देती है .

बाबा रामदेव ने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा की ” ये ड्रग माफिया की साजिश है . उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि उनकी दवा को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी तो केवल कोरोना पर हमारे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध का परिणाम सामने आया है तो दुनियाभर में तूफान आ गया।

अभी हमारे पांच सौ से ज्यादा वैज्ञानिक हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, अस्थमा, हेपेटाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया आदि कई अन्य रोगों पर लगातार शोध कर रहे हैं। जल्दी ही इन सभी रोगों को भी क्लिनिकल ट्रायल के रिजल्ट के आधार पर खत्म करने के चौंकाने वाले परिणाम पतंजलि दुनिया के सामने रखेगी।

उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य अपना कारोबार बढ़ाना न तो पहले था और न कभी रहेगा। हमने तो केवल देश को रोग मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की थी, उस पर आज भी कायम हैं उन्होंने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत पतंजलि को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए। “

दवाई के विवाद के चलते कई नई बातें सामने आई हैं। दवाई का का लॉन्च कोरॉना की दवाई बता कर ही हुआ था और यह दावा भी किया गया था कि यह दवाई ३-७ दिन में मरीज को कॉरोना मुक्त कर सकती है। लेकिन अब बदलते बयानों के साथ लोगो का भरोसा इस दवाई से उठता जारा है। जहा एक तरफ पतंजलि ने अभी तक क्लीनिकल ट्रायल सबमिट नहीं किए है वहीं दूसरी ओर यह दवाई मार्केट में अब कब और किस नाम से आएगी इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।

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